सामाजिक समरसता और हिन्दुत्व

सामाजिक समरसता और हिन्दुत्व

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सामाजिक समरसता और हिंदुत्व 

25 जून 1975 को देश में आपातकाल की घोषणा की गई | सर्वत्र एक ख़ामोशी छा गई-भय का वातावरण उत्पन्न हो गया | लोकनायक जयप्रकाश नारायण जैसे शीर्ष नेताओं सहित हजारों कार्यकर्ताओं को रातोंरात गिरफ्तार कर जेल की सीखचों में बन्द कर दिया | राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगा दिया गया-ऐसे समय में पूज्य बालासाहब के नेतृत्व ने देश को एक दिशा प्रदान की | सारी परिस्थिति को बदलते हुए 1977 में श्रीमती गाँधी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया | तात्कालिक महत्व के साथ-साथ आज भी वे विचार उतने ही प्रासंगिक और उपयोगी है | उनके बौद्धिक वर्गों का एक संकलन "सामाजिक समरसता और हिंदुत्व" पुस्तक के रूप में हम प्रस्तुत कर रहे है जो केवल स्वयंसेवको के लिए ही नही, अपितु सम्पूर्ण समाज के लिए हितकारी और प्रेरक सिद्ध होगी |

विषय सूचि :

1.सामाजिक समरसता और हिन्दू संगठन

2.वर्तमान चुनौती और संघ

3.हिन्दू संगठन - एक राष्ट्रिय आवश्यकता

4.यतो धर्मस्ततो जय : राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ

5.हिंदुत्व - तत्व और व्यवहार

6.भारत को अखंड रखना ही है

7.अल्पसंख्यवाद - एक विषबेल 


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Tags: Samajik Samrasata Aur Hindutwa