ज्योति जला निज प्राण की

ज्योति जला निज प्राण की

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ज्योति जला निज प्राण की 

१९४७ में हुए देश के विभाजन पर अनोकों पुस्तकें लिखी गई है | पर प्रस्तुत पुस्तक 'ज्योति जला निज प्राण की' अपने आप में एक विशेष कृति है | विभाजन की त्रासदी और उसके कारण उत्पन्न हुए संकट का संघ के स्वयंसेवकों ने समाज बन्धुओं को साथ लेकर किस प्रकार मुकाबल किया इसका बड़ा रोमांचक और सजीव वर्णन वास्तविक व् तथ्यपूर्ण घटनाओं के आधार पर किया गया है |

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