प्रकाशक : सुरुचि प्रकाशन

  

 
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ॐ राष्ट्राय स्वाहा -२  

  ‘ॐ राष्ट्राय स्वाहा‘ उपन्यास श्रीगुरुजी के जीवन के साथ एकरूप-एकात्म होकर लिखा गया है। श्रीगुरुजी के व्यक्तित्व का आकलन करने के लिए उनका निकट का परिचय आवश्यक नहीं है। श्रीगुरुजी जैसे व्यक्तित्व के धनि व्यक्ति के जीवन से घटना चक्र प्रभावीत होते है। इस प्रकार के श्रेष्ठ व्यक्ति ही वर्तमान का निर्माण करते जीवन-विचार और कार्य के परिणाम के प्रकाश में ही उनके व्यक्तित्व का आकलन किया जा सकता है।
श्रीगुरुजी के उदात्त जीवन में शब्दों को प्रभावित करने की ही नहीं, उन्हें युगानुकुल अर्थ प्रदान करने की भी क्षमता थी। वे आध्यात्मिक व्यक्ति थे। राजनीती से उन्हें प्रेम या लगाव नहीं था, फिर भी राजनितिक प्रश्नों पर उनका मत अचूक होता था।
पद, मद, संपत्ति, स्वार्थ, और लोकेशन से मुक्त, संकल्प  और स्नेह से युक्त श्रीगुरुजी का ध्यय्निष्ठ जीवन और कार्य अनेक काव्य –ग्रंथो का विषय है। उनके जीवन पर लिखा गया यह उपन्यास नयी पीढ़ी के लिए प्रेरण।दायी होगा। विषय की रोचकता, भाषा के लालित्य और कल्पना की उडान के कारण यह उपन्यास एक लेखन शिल्प बन गया है । विषय का चयन लेखिका श्रीमती मृणालिनी बाई जोशी के चिंतन का परिचायक है । इस उपन्यास का नायक अप्रतिम और अद्वितीय है। उसके विषय में चिंतन और लेखन का लालित्यपूर्ण हो जाना सहज स्वाभाविक है । लेखिका ने अपनी सरल, समर्थ तथा ओजस्वी भाषा में एक दुष्कर कार्य सम्पन्न किया है।
                                                  .... श्री अटल बिहारी वाजपेयी

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लेखक : मृणालिनी जोशी  

अंतरंग

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Book details:

In Stock : 3
Pages : 176
ISBN No : 978-93-84414-07-8
Binding : Paper
Weight : 158 grams

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