प्रकाशक : सुरुचि प्रकाशन

  

 
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विदेशी रानी (ऐतिहासिक कहानी संग्रह)  

लेखक ने प्रस्तुत कहानी संग्रह में प्राचीन इतिहास से अर्वाचिन तक यूनानी-सेनापति निकेटर सेल्यूकस की पुत्री हेलन से लेकर १९५० तक अनेक प्रसंगों तथा घटनाओं को कहानियों के रूप में, विभिन्न रसों में सरोबार कर प्रस्तुत किया है|

प्रबुद्ध लेखक ने भारतीय इतिहास के अनेक अनछुए प्रसंगों को प्रामाणिकता से छुआ है| अनेक भ्रामक तथा तथ्यहीन घटनाओं का रहस्य प्रकट किया है|

आचार्य रामरंग की ये कहानियॉं एक दीर्घ काल तक पाठकों के मन में देश-प्रेम, अतीत-गौरव तथा श्रेष्ठ मानव होने की चेतना उत्पन्न करती रहेंगी| आज हमें ऐसी कहानियों की ही सख्त आवश्यकता है जो नई नस्ल के मन पर देश-प्रेम, राष्ट्र-प्रेम, संस्कृति-प्रेम और मानव-प्रेम की मोहर लगा सकें|

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लेखक : आचार्य रामरंग  

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अंतरंग

१. विदेशी रानी (चाणक्य), २. त्रिनेत्र (चाणक्य), ३. गजनी में फाग (मेवाड़ी राजकुमार खुम्माण), ४. तुम तो मेरे अपने हो (देवल देवी, गुजरात नरेश कर्ण की पुत्री), ५. दुर्गा कहां है (कालिंजर की राजकुमारी दुर्गावती), ६. मैं दुर्गा हूँ (गोंडवाने की महारानी दुर्गावती), ७. तो बुन्देला नहीं (महाराजा वीरसिंह बुन्देला), ८. तेरे बाप की कबर ना खोदी तो (चौ. हीरामान जाट, ब्रज क्षेत्र), ९. लवंगी (उद्भट विद्वान पंडितराज जगन्नाथ), १०. लाल किले का घूँघट (मुगल बादशाह औरंगजेब), ११. सिद्ध सन्त स्वामी श्यामचरण दासजी (ईरानी आक्रान्त नादिरशाह), १२. जगत सेठ ला. सीताराम (मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रँगीला), १३. बलिदानी भक्त कविवर घनानन्द (मुगल बादशाह मुहम्मदशाह रँगीला), १४. मूँछ पैनाए तो (भरतपुर नरेश महाराजा जवाहरसिंह), १५. चलो बेटी (महाराजा अजितसिंह, मारवाड़), १६. भटियारे की औलाद (नबाब मुर्शिदाबाद), १७. शिवालय अप्पा गंगाधर (पेशवा के पुरोहित पं. अप्पा गंगाधर राव), १८. चलो परलोक सुधारें (पेशवा के महामंत्री नाना फड़नवीस, महाराष्ट्र), १९. मैं मूर्ति भंजक नहीं हूँ (महर्षि दयानन्द सरस्वती), २०. छींक के भागों छींका टूटा (संभवत: वायसराव लार्ड इरविन), २१. यह मेरे लिए ही हो रहा है (स्वामी विवेकानन्द), २२. भूतनाथ का भूत (क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद), २३. निजाम की जूती (पं. मदनमोहन मालवीय), २४. मैं जाता हूँ (शास्त्रार्थ महारथी पं. रामचंद्र जी देहलवी), २५. शास्त्रार्थ (महामना मालवीय जी), २६. आठ आने में मानस (कल्याण के यशस्वी संपादक हनुमानप्रसाद पोद्दार), २७. महंत से बड़ा कोई गुंडा नहीं (गोरक्षापीठाधीश्‍वर महंत दिग्विजयनाथ), २८. तमाचा एक गाल कई (हैदराबाद विजय, सरदार पटेल), २९. हरिद्वार में श्राद्ध (प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद)

Book details:

In Stock : 3
Pages : 251
ISBN No : 81-89622-91-9
Binding : Paper
Weight : 330 grams

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