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गुरुजी, पटेल, नेहरू पत्र-व्यवहार

Manufacturer: Suruchi Prakashan
स्वतन्त्रता के पश्‍चात् १९४८ में महात्मा गांधी की हत्या से उत्पन्न स्तब्धकारी स्थिति का लाभ उठाकर केंद्रीय कांग्रेस सरकार ने रा. स्व. संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया और सरसंघचालक श्री गुरुजी को बन्दिवास में रख दिया गया| न्यायालय ने कुछ ही दिनों में संघ को सर्वथा निर्दोष घोषित कर दिया| गृहमन्त्री सरदार पटेल ने भी प्रकट विवेचना और गुप्तर-सूचनाओं के भी आधार पर सार्वजनिक रुप से स्वीकार किया कि गांधी जी की हत्या से संघ का कुछ भी लेना-देना नहीं है| परन्तु फिर भी सरकार में बैठे कुछ लोगों के दुराग्रह के चलते संघ पर से प्रतिबन्ध नहीं हटाया गया तो श्री गुरुजी ने प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को इस सम्बन्ध में पत्र लिखे और फिर सरदार पटेल से वे मिले भी| उन तीनों का उन दिनों का वह पत्र-व्यवहार ऐतिहासिक महत्त्व का है| वह पत्राचार अब इस पुस्तिका के माध्यम से प्रकाशित किया है|
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स्वतन्त्रता के पश्‍चात् १९४८ में महात्मा गांधी की हत्या से उत्पन्न स्तब्धकारी स्थिति का लाभ उठाकर केंद्रीय कांग्रेस सरकार ने रा. स्व. संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया और सरसंघचालक श्री गुरुजी को बन्दिवास में रख दिया गया| न्यायालय ने कुछ ही दिनों में संघ को सर्वथा निर्दोष घोषित कर दिया| गृहमन्त्री सरदार पटेल ने भी प्रकट विवेचना और गुप्तर-सूचनाओं के भी आधार पर सार्वजनिक रुप से स्वीकार किया कि गांधी जी की हत्या से संघ का कुछ भी लेना-देना नहीं है| परन्तु फिर भी सरकार में बैठे कुछ लोगों के दुराग्रह के चलते संघ पर से प्रतिबन्ध नहीं हटाया गया तो श्री गुरुजी ने प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और उपप्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को इस सम्बन्ध में पत्र लिखे और फिर सरदार पटेल से वे मिले भी| उन तीनों का उन दिनों का वह पत्र-व्यवहार ऐतिहासिक महत्त्व का है| वह पत्राचार अब इस पुस्तिका के माध्यम से प्रकाशित किया है|

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