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कार्यकर्ता

अधिष्ठान : व्यक्तिमत्त्व : व्यवहार  अधिष्ठान : व्यक्तिमत्त्व : व्यवहार ‘कार्यकर्ता’ यह विचारधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संदर्भ में है| इस में अधिष्ठान, कार्यपद्धती और कार्यकर्ता इन तीन दृष्टीयों से संघ की चर्चा की गयी है| वैसे ये तीन विषय हम लोगों के सामान्य परिचय के हैं| इन के साधारण अर्थ भी सभी को ज्ञात हैं| किन्तु इन सर्वविहित सामान्य विषयों को मा. दत्तोपंत ठेंगडी की सर्वस्पर्शी प्रतिभा का स्पर्श होते ही वे एक नई प्रखरता, नया तेज और नया रूपलावण्य लेकर अपने सामने आते हैं| लोहे को भी सुवर्ण में परिणत करने वाली यह प्रतिभा जितनी अभिजात है, उतनी ही दत्तोपंत के प्रचंड अध्ययन और प्रगाढ़ चिंतन से वह विभूषित हैं| मुझे तो यह संपूर्ण पुस्तक, एक उपनिषद् की भॉंति, प्रत्यक्ष अनुभूति से प्राप्त मौलिक ज्ञान से ओतप्रोत लगती है| हॉं, उपनिषद्! संघोपनिषद्! हॉं, उपनिषद्! संघोपनिषद्! -मा. गो. वैद्य
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अधिष्ठान : व्यक्तिमत्त्व : व्यवहार 

‘कार्यकर्ता’ यह विचारधन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संदर्भ में है|

इस में अधिष्ठान, कार्यपद्धती और कार्यकर्ता इन तीन दृष्टीयों से संघ की चर्चा की गयी है| वैसे ये तीन विषय हम लोगों के सामान्य परिचय के हैं| इन के साधारण अर्थ भी सभी को ज्ञात हैं| किन्तु इन सर्वविहित सामान्य विषयों को मा. दत्तोपंत ठेंगडी की सर्वस्पर्शी प्रतिभा का स्पर्श होते ही वे एक नई प्रखरता, नया तेज और नया रूपलावण्य लेकर अपने सामने आते हैं|

लोहे को भी सुवर्ण में परिणत करने वाली यह प्रतिभा जितनी अभिजात है, उतनी ही दत्तोपंत के प्रचंड अध्ययन और प्रगाढ़ चिंतन से वह विभूषित हैं|

मुझे तो यह संपूर्ण पुस्तक, एक उपनिषद् की भॉंति, प्रत्यक्ष अनुभूति से प्राप्त मौलिक ज्ञान से ओतप्रोत लगती है|

हॉं, उपनिषद्! संघोपनिषद्!

-मा. गो. वैद्य

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